ब्रेकिंग : बुल्डोजर कारवाई पर मचा बवाल, किसके आदेश से विवादित रिसोर्ट पर चला बुल्डोजर, मामले में भाजपा विधायक की बड़ी मुश्किलें

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हरिद्वार 29 सितंबर 2022। अंकिता हत्याकांड की गुत्थी रोजाना सुलझने ने की जगह उलझती जा रही है। मामले में रोजाना ऐसे नए तथ्य और साक्ष्य सामने आ रहे हैं जिनके कारण प्रदेश में बवाल मचा हुआ है। 18 सितंबर की रात से गायब अंकिता भंडारी का शव 24 सितंबर की सुबह ऋषिकेश के चीला नहर से मिला। इससे पहले ही पुलिस ने मुख्य आरोपी पुलकित आर्य सौरव भास्कर और अंकित गुप्ता को 23 तारीख की दोपहर गिरफ्तार कर लिया था।

यहां तक तो ठीक था लेकिन 23 तारीख की रात को पुलकित आर्य के रिसोर्ट पर बुलडोजर की कार्रवाई से जहां अधिकांश लोग पहले प्रसन्न हुए, लेकिन बाद में इसी कार्रवाई पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं!

क्योंकि जिस रिसोर्ट से अंकिता हत्याकांड के बड़े सबूत जुटाए जा सकते थे। वहां पर आखिर बिना जांच खत्म हुए बुलडोजर किसने चलाया और बुलडोजर किसके आदेश पर देर रात रिसोर्ट पर पहुंचा था? इसका जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन बुलडोजर चलने के समय वाहवाही लूटने वाले नेताओं में से एक यमकेश्वर की विधायक रेनू बिष्ट ने तो सीएम पुष्कर सिंह धामी को बुलडोजर की कार्रवाई के लिए धन्यवाद दिया और इतना ही नहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड पुलिस ने भी बुलडोजर की कार्रवाई को अपने सोशल मीडिया के ऑफिशल पेज से पोस्ट किया।

जब इस बारे में जिला प्रशासन से बात की गई तो पौड़ी के जिलाधिकारी डॉ0 विजय कुमार जोगदण्डे द्वारा रिसोर्ट पर बुलडोजर की कार्रवाई से साफ इंकार कर दिया गया और उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा बुलडोजर नहीं भेजा गया था। अब मामले में और दिलचस्प मोड़ आ गया और प्रश्नचिन्ह तो यहां तक खड़े होने लगे कि क्या अंकिता हत्याकांड से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने के लिए बुलडोजर रिपोर्ट पर भेजा गया था?

बवाल इससे ज्यादा तब और मच गया जब बुलडोजर द्वारा दीवार तोड़ने के बाद उस कमरे को तोड़ दिया गया जिसमें अंकिता भंडारी रहती थी। मामले में बवाल बढ़ता देख पौड़ी के डीएम ने 28 सितंबर को यह बयान दिया कि बुलडोजर जिला प्रशासन द्वारा ही भेजा गया था और पुलिस ने 22 सितंबर और 23 सितंबर को रिजल्ट की वीडियोग्राफी कर साक्ष्य इकट्ठे कर लिए थे। लेकिन अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर जब जिलाधिकारी को यह पता था तो शुरू में उन्होंने बुलडोजर की कार्रवाई और बुलडोजर भेजने की बात पर साफ इंकार क्यों किया? और अब बुलडोजर की कार्रवाई को जिला प्रशासन की सहमति क्यों प्रदान की जा रही है?

आखिर किस व्यक्ति का नाम प्रशासन छुपाने की कोशिश कर रहा है? अब यह मुद्दा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है और विपक्ष से लेकर देश के लोग यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर देर रात रिसोर्ट पर बुलडोजर लेकर कौन पहुंचा था और किस की इजाजत पर यह कार्रवाई हुई? मामले में एक और अनसुलझा रहस्य तो यह भी है कि बुल्डोजर चलने वाली रात से अगले दिन ही रिसोर्ट के पीछे स्थित फैक्ट्री में आग कैसे लग गई? और पुलिस प्रशासन जब रिसोर्ट के बाहर तैनात किया गया था तो कौन लोग रिसोर्ट के अंदर थे जिन्होंने इस घटना को अंजाम दिया? इस मामले में पुलिस का कहना है कि आक्रोशित लोगों ने पीछे फैक्ट्री में जाकर आग लगाई थी अब यह सब जांच का विषय है और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकता है कि मामले में पूरा सच क्या है?

आम आदमी पार्टी ने कि मुकदमा दर्ज करने की मांग

वनंतरा रिसोर्ट पर बुलडोजर की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए तो अब यह राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है। अंकिता हत्याकांड से जहां पूरे प्रदेश में उबाल है तो वहीं अब आम आदमी पार्टी भी जनता की भावनाओं का समर्थन करने के साथ ही मामले में कार्रवाई की बात कह रही है्।

जिस रात रिसोर्ट में बुल्डोजर चला वहां भाजपा की यमकेश्वर से विधायक रेनू बिष्ट मौजूद थी और उन्होंने सोशल मीडिया पर इसका वीडियो भी डाला था। तो वहीं अब इस मामले में पौड़ी जिले के आम आदमी पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस को तहरीर देकर रेनू बिष्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और कार्रवाई करने की मांग की है। उनका आरोप है कि रेनू बिश्नोई रिजॉर्ट पर बिना इजाजत के बुलडोजर चलवा के साक्ष्य को खत्म करने का काम किया है।

 

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