हरिद्वार 12 अगस्त। हरिद्वार के ओम नीलेश्वर महादेव नील पर्वत पर विराजमान स्वयंभू महादेव का स्थान है, जिसका शिव पुराण आदि पुराणों में भी वर्णन है।
नीलेश्वर महादेव मंदिर के महंत श्री प्रेमदास महाराज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गुरुओं की परंपरा के अनुसार अखंड धूनी के प्रचलित महादेव का सावन महोत्सव के भंडारे का आयोजन किया जाता है। यह आदि काल से चला आ रहा है उसी के उपलक्ष में यह भंडारा भी आयोजित किया जाता है।
जिसमें हरिद्वार के सभी अखाड़ों के संत, महंत, श्रीमहंत एवं भक्त आकर महादेव के दर्शन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं साथ ही महादेव के वार्षिक भंडारे का प्रसाद ग्रहण करते हैं। यहां पर सावन में भक्तों द्वारा अभिषेक पूजन अनुष्ठान किया जाता है। इस स्थान पर पूजन करने से अनेकों फल प्राप्त होते हैं, वरदान प्राप्त होता है और महादेव की अति कृपा रहती है।
साथ ही उन्होंने बताया कि यहां से दक्ष प्रजापति महादेव का मंदिर भी साफ दिखाई देते थे, यहीं पर बैठकर महादेव ने वीरभद्र को उत्पन्न किया था और दक्ष प्रजापति यज्ञ का विध्वंस किया था। अब महादेव स्वयं यहां पर विराजमान हैं, आदि शक्तियां विराजमान हैं।
यह मंदिर घनघोर जंगलों से घिरा हुआ है, पशु पक्षी हाथी, शेर, चीते यहां पर महादेव के दर्शन करने आते रहते हैं और इतना ही नहीं सावन में समय समय पर बिच्छू सर्प भी आते हैं।
वार्षिकोत्सव के अवसर पर महामंडलेश्वर कपिल मुनि, नरसिंह धाम पीठाधीश्वर रामानंदचार्य अयोध्याचार्य महाराज, महामंडलेश्वर चिदविलासानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर अनंतानंद, महामंडलेश्वर चिदविलासनंद सरस्वती, महामंडलेश्वर जगदीश दास, महंत रघुवीर दास, बाबा हठयोगी, महंत सूरज दास, स्वामी नित्यानंद, महंत गुरमीत सिंह आदि तमाम गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।