हरिद्वार के भूपतवाला स्थित धर्म कुटी में वीरवार को ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन दास महाराज का 55 वां निर्वाण दिवस, ब्रह्मलीन स्वामी मंसानद महाराज का 13 वां निर्वाण दिवस व ब्रह्मलीन स्वामी परगन दास महाराज का 7 वां निर्वाण दिवस आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य रूप से हरिद्वार के वरिष्ठ साधु संतों ने पहुंचकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम की अध्यक्षता एमए स्वामी इंद्रदास महाराज ने की, कार्यक्रम में भक्तों को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर हरि चेतनानंद ने कहा कि संत इस धरती पर ईश्वर का रूप होते हैं। वो हमें जीना सिखाते हैं, अंधेरे में दीपक बनते हैं। किसी महान संत को श्रद्धांजलि देते समय शब्द भी मौन हो जाते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमने एक युग को खो दिया है।
पूज्य स्वरूप दास व निरंजन दास महाराज सिर्फ एक शरीर नहीं थें, वो चलते-फिरते तीर्थ थे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में स्वामी इंद्रदास महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में गाय को “गौ माता” कहा गया है। गौ सेवा को सबसे बड़े पुण्यों में गिना जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं। गौ सेवा से सभी देवता प्रसन्न होते हैं। शास्त्रों के अनुसार गौ सेवा, गौ दान और गौ ग्रास देने से बड़े से बड़े पाप कट जाते हैं। संत रविंदर दास ने सभी महापुरुषों का फूल माला बनाकर स्वागत किया।
इस अवसर पर महंत अमरीक दास, महंत मक्खन दास, महंत प्रहलाद दास महंत रामेश्वरानंद, महामंडलेश्वर राम मुनि, महामंडलेश्वर हरिचेतनानंद,स्वामी स्वामी राघवानंद, स्वामी सतपाल, महंत ओमानंद, महंत मोहन सिंह, महंत तीर्थ सिंह समेत भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
धर्म कुटी में ब्रह्मलीन स्वामी अर्जुन दास, ब्रह्मलीन स्वामी मंसानद व ब्रह्मलीन स्वामी परगन दास महाराज का निर्वाण दिवस आयोजित
